लेखक---श्रीमन्महाराजकुमार दुर्गाशंकरप्रसादसिंह
कुमार साहब हिन्दी के उदीयमान अभिनव लेखक हैं। आपने यह गद्य काव्य मयी रचना करके, अपने नितान्त मौलिक विचारों से हिन्दी को गौरवान्वित करने की सफल चेष्टा की है। हिन्दी प्रेमीगण इस गद्य काव्य का अवश्य रसास्वादन करें।
मूल्य सिर्फ ।।।)
छपाई-सफ़ाई का, काग़ज़, कवंहरिंग बिल्कुल इंग्लिश!
इस पुस्तक का काग़ज़ ४० पौंड एण्टिक है।
यह कार्य भारत में सार्वजनिक डोमेन है क्योंकि यह भारत में निर्मित हुआ है और इसकी कॉपीराइट की अवधि समाप्त हो चुकी है। भारत के कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अनुसार लेखक की मृत्यु के पश्चात् के वर्ष (अर्थात् वर्ष 2024 के अनुसार, 1 जनवरी 1964 से पूर्व के) से गणना करके साठ वर्ष पूर्ण होने पर सभी दस्तावेज सार्वजनिक प्रभावक्षेत्र में आ जाते हैं।
यह कार्य संयुक्त राज्य अमेरिका में भी सार्वजनिक डोमेन में है क्योंकि यह भारत में 1996 में सार्वजनिक प्रभावक्षेत्र में आया था और संयुक्त राज्य अमेरिका में इसका कोई कॉपीराइट पंजीकरण नहीं है (यह भारत के वर्ष 1928 में बर्न समझौते में शामिल होने और 17 यूएससी 104ए की महत्त्वपूर्ण तिथि जनवरी 1, 1996 का संयुक्त प्रभाव है।
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